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उत्तरकाशी की सब्जी मंडी क्यों शिफ्ट नहीं हुई? माननीयों के झूठे वादों से लोग परेशान, गंगोत्री विधानसभा के हाल बुरे !

प्रकाश रांगड़, उत्तरकाशी

आने वाले समय में 2027 का विधानसभा चुनाव नजदीक है। चुनाव जब आता है तो दावे भी जोर शोर से किए जाते हैं। ऐसा नहीं कि चुनाव आने वाला है और अब दावे होंगे विकास और साथ जीने मरने के। नेताओं की जुबान से अक्सर झूठे वादे निकलते ही हैं। खासकर चुनाव चुनावी मौसम में। उत्तरकाशी शहर का हाल ही देख लीजिए। 

गंगोत्री विधानसभा में बीते चुनावों में इस उत्तरकाशी शहर को विकास के वादे तो चुने गए जनप्रतिनिधियों ने बहुत आत्मविश्वास के साथ किए, लेकिन जब बात धरातल की होती है तो कुछ नजर नहीं आता।


 U Times, No.1 ...फोटो (फाइल)

जिला कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष प्रदीप रावत का कहना है कि 2022 में विधानसभा चुनाव हुआ तो नव निर्वाचित विधायक की ओर से दावा किया गया था कि बस अड्डे से उत्तरकाशी की सब्जी मंडी को हटाकर दूसरी जगह शिफ्ट करेंगे, लेकिन चार साल लगभग पूरे हो गए, आज तक कुछ नहीं हुआ। तब जोर शोर से दावा किया गया था कि बस अड्डे में यातायात व्यवस्था की बेहतरी के लिए सब्जी मंडी को काली कमली के पीछे खाली जगह में शिफ्ट किया जाएगा, लेकिन सवाल वहीं खड़ा होता है कि सब्जी मंडी शिफ्ट क्यों नहीं हुई? जनता पूछती है कि जब दावा किया गया तो वादा पूरा क्यों नहीं हुआ? सच तो ये है कि माननीयों की बातों में हमेशा दम नहीं होता। ये चार साल का कार्यकाल इस बात की गवाही देता है कि चुने गए जनप्रतिनिधि और सरकार जो दावे करती है, वो पूरे होते नहीं। 

स्थानीय जनमानस हमेशा यही सपने देखता रह गया कि चुने गए जनप्रतिनिधि जो बोले, देर सवेर वो काम होना ही है, लेकिन वक्त ने उनकी उम्मीदों को तोड़ने का काम किया है। या यूं कहें कि झूठे वादे सिर्फ स्वार्थ की राजनीति का हिस्सा बनकर रह गए। आज उत्तरकाशी फिर से 2027 के विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़ा है। ऐसे में जिन्होंने जो वादे किए वो तो पूरे नहीं हो पाए, लेकिन वो फिर से इन्हीं झूठे वादों के साथ फिर चुनाव लड़ेंगे ये लगभग तय है।

इन सबके बीच सवाल ये है कि क्या स्थानीय वोटर फिर उनका साथ देंगे? ये जनता के माइंडसेट पर भी बहुत कुछ निर्भर करता है। ये अनसुलझा सवाल 2027 के विधानसभा चुनाव परिणाम तक उनके जहन में जरूर रहेगा, जो विकास के दावे तो करते हैं मगर धरातल पर फिसड्डी साबित हो जाते हैं। चुनाव अभी दूर है, लेकिन सवाल चुने गए माननीयों से अभी से पूछे जाने लगे हैं।

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